गाफिल स्वामी की कुंडलिया
कुण्डलिया-
✍ गाफिल स्वामी
1
बना बड़ा है कर्म से, हर कोई इंसान ।
बिना कर्म मिलता नहीं, धन शौहरत सम्मान ।।
धन शौहरत सम्मान, कर्म से सबको मिलता ।
कर्म प्रगति की बेलि, कर्म से जीवन चलता ।।
'गाफिल' ये संसार, कर्म से तना खड़ा है ।
बिना कर्म इंसान, न कोई बना बड़ा है ।।
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2
पहनावे से धर्म की, होती अब पहचान ।
लेकिन मूरख भूल मत, पहले तू इंसान ।।
पहले तू इंसान, रंग गोरा या काला ।
खून सभी का लाल, पादरी पंडित लाला ।।
गाफिल कहता सत्य, धर्म मन को भरमावे ।
बन सच्चा इंसान, पहन कुछ भी पहनावे ।।
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3
पहले बन इंसान तू, फिर चाहे कुछ और।
ज्यादा दिन चलता नहीं, मैं मेरी का दौर।।
मैं मेरी का दौर, नहीं होता है अच्छा।
राह सत्य की नेक, प्रेम का पथ है सच्चा।।
स्वामी गाफिल दास, देख मत स्वप्न रुपहले।
बन तू सेठ अमीर, मगर बन इंसा पहले।।
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4
सच्चाई का जगत में, सदा हुआ गुणगान।
झूँठ द्वेष छल पाप का, होता नहीं बखान।।
होता नहीं बखान, झूठ सच से घबड़ाता।
द्वेष और छल पाप, मनुज को नीच बनाता।
स्वामी गाफिल दास, सत्य का पथ सुखदाई।
छोड़ झूँठ छल पाप, मित्र अपना सच्चाई।।
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5
चलता है जो सत्य पर, पाता सुख सम्मान।
झूठा बेईमान नित, सहता है अपमान।।
सहता है अपमान, झूठ के जो गुण गाता।
बना सत्य को मित्र, सत्य है सुख का दाता।।
स्वामी गाफिल दास, कमल कीचड़ में खिलता।
दुख में भी हरसाय, सत्य पथ पर जो चलता।।
✍ गाफिल स्वामी
गाँव +पोस्ट - लालपुर
इगलास (अलीगढ़)
उ० प्र०
बहुत ही सुंदर कुण्डलिया, अनंत हार्दिक शुभकामनाएं, जय हो स्वामी जी की
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