नारी विमर्श पर दोहे-
नारी विमर्श पर दोहे- प्राणप्रिया की ताड़ना , ऐसा करे विकास । हुए अज्ञ से विज्ञ फिर,कविवर तुलसी दास ।।-1 मैं कमला, मैं कालिका, मैं वामा घर द्वार । मानव रखना ध्यान मैं, दो धारी तलवार ।।-2 युग निर्माता मानवी, आँगन की मुस्कान । छीना आज दहेज ने, नारी का सम्मान ।।-3 दुल्हन बनकर एक दिन,रही पिया के साथ । सुबह सिपाही बन गए , मेंहदी वाले हाथ ।।-4 ...