गाफिल स्वामी की कुंडलिया
कुण्डलिया- ✍ गाफिल स्वामी 1 बना बड़ा है कर्म से, हर कोई इंसान । बिना कर्म मिलता नहीं, धन शौहरत सम्मान ।। धन शौहरत सम्मान, कर्म से सबको मिलता । कर्म प्रगति की बेलि, कर्म से जीवन चलता ।। 'गाफिल' ये संसार, कर्म से तना खड़ा है । बिना कर्म इंसान, न कोई बना बड़ा है ।। ***** ***** ***** 2 पहनावे से धर्म की, होती अब पहचान । लेकिन मूरख भूल मत, पहले तू इंसान ।। पहले तू इंसान, रंग गोरा या काला । खून सभी का लाल, पादरी पंडित लाला ।। गाफिल कहता सत्य, धर्म मन को भरमावे । बन सच्चा इंसान, पहन कुछ ...