Posts

शिव कुमार दीपक का परिचय

जीवन परिचय नाम- शिव कुमार ‘दीपक’ पिता - स्व०श्री खुशाली राम बघेल माता - स्व०श्रीमती चन्द्रवती देवी जन्म तिथि - 10अगस्त 1975 पता- गाँव- बहरदोई , पत्रालय- आरती जनपद- हाथरस ( उ० प्र० ) भारत - 281307 लेखन - गद्य एवं पद्य की विभिन्न विधाओं में प्रिय छंद - दोहा एवं कुण्डलिया संपादन- दोहा-दर्पण ( दोहा-कुण्डलिया को समर्पित पत्रिका) अंक- 1,2 प्रकाशन - ( साझा संकलन ) 1- विश्व-गंधा (संपादक - डॉ० श्याम सुंदर सुमन) 2003 2- आम जन की वेदना (सं०- ज्ञानेद्र साज ) 2010 3- कुण्डलिया छंद के सात हस्ताक्षर , 2012 (सं०- त्रिलोक सिंह ठकुरेला ) 4- कुण्डलिया कानन ( सं०- त्रिलोक सिंह ठकुरेला ) 2014 5- समानांतर (सं०-यशोधरा यादव 'यशो', सपना मांगलिक) 6- समकालीन दोहा कोश (सं०- हरेराम समीप ) 2015 7- आधुनिक दोहा ( सं०- रघुविन्द्र यादव ) 2018 8- मानक कुण्डलिया ( सं०- रघुविन्द्र यादव ) 2019 9- दोहे मेरी पसंद के ( सं०- रघुविन्द्र यादव ) 2020 10- अपना समाज ( डॉ० राजेन्द्र मिलन ) 11- नमन मात...

नारी विमर्श पर दोहे-

नारी विमर्श पर दोहे-   प्राणप्रिया की ताड़ना , ऐसा  करे  विकास । हुए अज्ञ से विज्ञ फिर,कविवर तुलसी दास ।।-1                                                             मैं कमला, मैं कालिका, मैं वामा घर द्वार । मानव रखना ध्यान मैं, दो धारी  तलवार ।।-2 युग निर्माता मानवी, आँगन की मुस्कान । छीना आज दहेज ने, नारी  का सम्मान ।।-3                                                                           दुल्हन बनकर एक दिन,रही पिया के साथ । सुबह सिपाही बन गए , मेंहदी  वाले  हाथ ।।-4                                       ...

गाफिल स्वामी की कुंडलिया

कुण्डलिया-                                 ✍   गाफिल स्वामी                   1 बना  बड़ा है कर्म  से, हर कोई इंसान । बिना कर्म मिलता नहीं, धन शौहरत सम्मान ।। धन शौहरत सम्मान, कर्म से सबको मिलता । कर्म प्रगति की बेलि, कर्म से जीवन चलता ।। 'गाफिल' ये  संसार, कर्म से  तना खड़ा है । बिना  कर्म इंसान, न  कोई बना बड़ा है ।।       *****             ***** *****                       2 पहनावे  से धर्म की, होती  अब पहचान । लेकिन  मूरख भूल  मत, पहले तू  इंसान ।। पहले  तू इंसान, रंग  गोरा या काला । खून सभी का लाल, पादरी पंडित लाला ।। गाफिल कहता सत्य, धर्म मन को भरमावे । बन सच्चा इंसान, पहन  कुछ ...

शिव कुमार दीपक के दोहे

दोहे -                           ✍  शिव कुमार 'दीपक' रिश्ते अब  रिसते हुए , कलयुग  का उपहार । 'प्रेम सदन' घर पर लिखा, उसमें नित तकरार ।।-1 झूठ नही वह बोलता, जिसमें बसा कबीर । चाहे रख दो कण्ठ पर , चाकू या शमशीर ।।-2 लेकर खुशियां साथ में, आया बिना लिबास । सिर्फ कफ़न के वास्ते , इतना  बड़ा प्रयास ।।-3 यंग  इंडिया  धन्य है ,  कैसा तेरा प्यार  ? अब बूढ़े माँ-बाप को, समझे सिर का भार ।।-4 कहते भ्रष्टाचार पर, किया करारा वार । दूनी  रिश्वत  माँगता,---बाबू , थानेदार ।।-5 मस्त पवन की चाल पर,-- नाचें मन में मोर । मतवाली ये खिड़कियां, झाँकें उसकी ओर ।।-6 मुखिया के घर आ रहा,जब से थानेदार । तब से झगड़े बढ़ गए ,बढ़ी रार-तकरार ।।-7 लटकाये हैं  कंठ में, राम  और हनुमान । चाल-चलन से दिख रहे,रावण की संतान ।।-8 जग में मानव के मिले, हमको कई प्रकार । कोई  नफरत बाँटता, को...

अहिल्याबाई की आरती

       अहिल्याबाई की आरती जय अहिल्या बाई ! माँ,जय अहिल्या बाई !! दया  धर्म की  मूरत , शिव की  अनुयायी ।।जय---- जन्म मानको के घर, चौंडी में पाया । ससुर मल्हार होल्कर,पति खंडे राया ।।जय----1 सहे  निजी जीवन  में , तुमने दुख भारी । बनीं लोक माता तुम, जन-जन दुख हारी ।।जय---2 तीस वर्ष मालव पर , तुमने राज किया । हर प्राणी संरक्षित, सुख के साथ जिया ।।जय----3 तुमने  राघोवा के , दर्प  हरे सारे । समर भूमि में तुमसे ,चन्द्रावत हारे ।।जय---4 हत्या लूट जहाँ थी , पेशे गत  जारी । वश में किये शक्ति से,तुमने पिंडारी ।।जय----5 मुख पर दिव्य अलौकिक,शोभा कल्याणी । धनगर वंश शिरोमणि , जनप्रिय महारानी ।।जय---6 यश-प्रताप परहित का,जब जग में छाया । महा विरुद जीते जी , ”पुण्यश्लोक”पाया ।।जय----7 ग्रंथ कार  करते हैं , शब्दों  से पूजा । प्रजा परायण तुम-सा, हुआ नहीं दूजा।।जय----8 तुम-सा शासक कोई , भारत फिर पावे । रोज़ी-रोटी छत  हो , मन का डर ,जावे ।।जय---9 माँ तेरी  यश ...

शिव कुमार 'दीपक' का जीवन परिचय

               जीवन परिचय  नाम-        शिव कुमार ‘दीपक’ पिता  - स्व०श्री खुशाली राम            बघेल माता  - स्व०श्रीमती चन्द्रवती देवी जन्म तिथि -10अगस्त 1975 पता-        गाँव- बहरदोई , पत्रालय-    आरती जनपद- हाथरस ( उ० प्र० )             भारत - 281307 लेखन -    गद्य एवं पद्य की   विभिन्न विधाओं में प्रिय छंद -  दोहा एवं कुण्डलिया प्रकाशन -  दर्जनों समवेत काव्य संकलन ,शोध ग्रंथों  एवं देश की विभिन्न साहित्यक पत्र पत्रिकाओं  में रचनाएं प्रकाशित । प्रसारण- आकाशवाणी मथुरा   और आकाशवाणी दिल्ली से कविताओं का प्रसारण । सम्मान - 1-साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम  अकादमी (प्रतापगढ़) द्वारा वर्ष 2008 का हिंदी सेवी सम्मान । 2- विमल साहित्य सदन (मथुरा)  द्वारा व...

शरद के दोहे :- ✍ शिव कुमार 'दीपक'

शरद के दोहे-                       ✍ शिव कुमार 'दीपक' की अगुवानी महल ने, हुआ हास परिहास । लगे छलकने शिशिर में,मदिरा भरे गिलास ।।-1 देव दिवाकर धूप की, भेजें चादर आप । होरी करता रात भर,धूप-धूप का जाप ।।-2 कँपी  रात भर  झोपड़ी, गर्म  रहे प्रासाद । ठिठुर-ठिठुर दुखिया करे,जाड़े का अनुवाद ।।-3 भरी पेटियां शीत की, आयीं  मेरे गाँव । तपने लगे अलाव पर,कई घरों के पाँव ।।-4 निष्ठुर मारे नारि को, ज्यों कोड़ों  की मार ।        शीत प्रकृति पर कर रहा, ऐसा तेज प्रहार ।।-5      लक्ष्मण रेखा खींच कर, सो जाते  प्रासाद । लाँघ उसे कब जा सका,जाड़े का उन्माद ।।-6  वर्षा  और समीर से, शीत  हुआ बलवान । काँप-काँप कर कट रहा,रात और दिनमान ।।-7 भूखी  सोये झोपड़ी, काँपे  सारी रात । होरी का दिनमान क्या, बुरे हुए हालात ।।-8 सर्द पेटियां शिशिर की,लाया...