अहिल्याबाई की आरती

       अहिल्याबाई की आरती

जय अहिल्या बाई ! माँ,जय अहिल्या बाई !!
दया  धर्म की  मूरत , शिव की  अनुयायी ।।जय----
जन्म मानको के घर, चौंडी में पाया ।
ससुर मल्हार होल्कर,पति खंडे राया ।।जय----1
सहे  निजी जीवन  में , तुमने दुख भारी ।
बनीं लोक माता तुम, जन-जन दुख हारी ।।जय---2
तीस वर्ष मालव पर , तुमने राज किया ।
हर प्राणी संरक्षित, सुख के साथ जिया ।।जय----3
तुमने  राघोवा के , दर्प  हरे सारे ।
समर भूमि में तुमसे ,चन्द्रावत हारे ।।जय---4
हत्या लूट जहाँ थी , पेशे गत  जारी ।
वश में किये शक्ति से,तुमने पिंडारी ।।जय----5
मुख पर दिव्य अलौकिक,शोभा कल्याणी ।
धनगर वंश शिरोमणि , जनप्रिय महारानी ।।जय---6
यश-प्रताप परहित का,जब जग में छाया ।
महा विरुद जीते जी , ”पुण्यश्लोक”पाया ।।जय----7
ग्रंथ कार  करते हैं , शब्दों  से पूजा ।
प्रजा परायण तुम-सा, हुआ नहीं दूजा।।जय----8
तुम-सा शासक कोई , भारत फिर पावे ।
रोज़ी-रोटी छत  हो , मन का डर ,जावे ।।जय---9
माँ तेरी  यश गाथा , कवि ‘दीपक’ गाए ।
कलयुग की देवी को ,जग शीश झुकाए ।।जय---10

         लेखक-  शिव कुमार ‘दीपक’
                  बहरदोई, सादाबाद
                  हाथरस (उ० प्र०)
                  मो०- 8126338096



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